हाइड्रोजन बनाने की तकनीक में महंगी धातुओं पर निर्भरता घटाने के लिए बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने अणुओं की बनावट पर काम किया है। सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज यानी CeNS की टीम ने ऐसा कार्बनिक पदार्थ तैयार किया, जिसके अणु पानी में अपने आप व्यवस्थित हो जाते हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 9 सितंबर को इसकी जानकारी दी।
टीम ने एस्पार्टिक एसिड नाम के अमीनो एसिड को प्रकाश सोखने वाले PDI अणु से जोड़ा। पानी में इनकी जमावट से दो आयामी नैनोशीट बनीं। इस व्यवस्था में प्रकाश का अवशोषण और उससे पैदा होने वाले विद्युत आवेशों का अलगाव बेहतर हुआ।
18 प्रतिशत का मतलब क्या है
प्रयोग में इस पदार्थ का फोटोकरंट सामान्य, बिना ऐसी जमावट वाले रूप से करीब 18 प्रतिशत अधिक मिला। फोटोकरंट प्रकाश के असर से उत्पन्न विद्युत धारा है। यह आंकड़ा हाइड्रोजन की मात्रा में 18 प्रतिशत बढ़ोतरी या इतनी ऊर्जा दक्षता का दावा नहीं है।
रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री के जर्नल रिकॉर्ड में शोध के पहली बार प्रकाशित होने की तारीख 26 जून 2026 है। इसका नेतृत्व डॉ. गौतम घोष और डॉ. आशुतोष के. सिंह ने किया। नतीजे धातु-मुक्त पदार्थों से सौर ऊर्जा रूपांतरण की दिशा दिखाते हैं; व्यावसायिक हाइड्रोजन उत्पादन शुरू होने की घोषणा नहीं की गई है।
स्रोत और संदर्भ
- PIB / विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय · Self-assembly of organic molecules opens a new path to green hydrogen production ↗9 सितंबर 2026
- Royal Society of Chemistry · Metal-Free Supramolecularly Engineered Catalysis: Perylene Diimide-Amino Acid Conjugates for Photoelectrochemical Water Splitting ↗26 जून 2026
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।



